यूँ मैं सीधा गया वहशत में बयाबाँ की तरफ़ हाथ जिस तरह से आता है गरेबाँ की तरफ़

“So straight toward the wilderness I rushed in wild frenzy, just as instinctively the hand flies to tear open the collar.”

— नज़्म तबातबाई
अर्थ

मैं दीवानगी की हालत में सीधे जंगल की ओर इस तरह चला गया, जैसे हाथ खुद-ब-खुद गरेबान की तरफ बढ़ता है।

विस्तार

उर्दू शायरी में दीवानगी की इन्तेहा दो चीज़ों से पहचानी जाती है—गिरेबाँ चाक करना और वीराने की तरफ़ भाग जाना। शायर यहाँ कहते हैं कि जब वहशत का दौरा पड़ा, तो वो सेहरा की तरफ़ इतनी सहजता और तेज़ी से दौड़े, जैसे तकलीफ़ में हाथ अपने आप कॉलर फाड़ने के लिए बढ़ जाता है। इस ख़ूबसूरत उपमा के ज़रिए वो बयाँ कर रहे हैं कि असीम दर्द में दुनिया छोड़ वीराने की ओर भागना कोई सोच-समझ कर लिया गया फ़ैसला नहीं, बल्कि एक बेबस और कुदरती खिंचाव होता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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