बैठे बैठे दिल-ए-ग़म-गीं को ये क्या लहर आई उठ के तूफ़ान चला दीदा-ए-गिर्यां की तरफ़

“All of a sudden, what whim overtook this sorrow-laden heart? / A tempest rose and surged toward these weeping eyes.”

— नज़्म तबातबाई
अर्थ

बैठे-बिठाए इस उदास दिल में अचानक यह कैसी तरंग उठी कि एक तूफ़ान उठकर रोती हुई आँखों की ओर चल पड़ा।

विस्तार

यह शेर ग़म के उस अचानक उमड़ने वाले दर्द को बयां करता है जो इंसान को बिल्कुल ख़ामोशी में अचानक आ घेरता है। दिल यूँ तो चुपचाप उदास बैठा था, मगर अचानक यादों की ऐसी लहर उठी जिसने दबे हुए जज़्बात को एक तूफ़ान बना दिया और वह अश्कों के रास्ते बहने के लिए आँखों की तरफ़ चल पड़ा। यहाँ दिल की तड़प और आँखों की नमी मिलकर यह अहसास कराते हैं कि गहरा दर्द कभी भी बेकाबू होकर छलक सकता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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