यूँ तो न तेरे जिस्म में हैं ज़ीनहार हाथ देने के ऐ करीम मगर हैं हज़ार हाथ

“Though in truth Your form bears not a single hand, yet to bestow, O Bounteous One, a thousand hands expand.”

— नज़्म तबातबाई
अर्थ

यूँ तो तेरे वजूद में कोई हाथ नहीं है, लेकिन ऐ बेहद सख़ी ईश्वर, दूसरों को देने और नवाज़ने के लिए तेरे हज़ारों हाथ हैं।

विस्तार

यह शेर ईश्वर की असीम दया और उदारता की बेहद ख़ूबसूरत तस्वीर पेश करता है। शायर कहता है कि यूँ तो ख़ुदा का कोई जिस्मानी वजूद या हाथ नहीं हैं, लेकिन जब वह देने पर आता है, तो लगता है जैसे उसके हज़ारों हाथ एक साथ नेमतें बरसा रहे हों। यह ख़्याल दिल को एक गहरा सुकून देता है कि ऊपर वाले की इनायत और रहमत अदृश्य रास्तों से हर पल हम तक पहुँचती रहती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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