“It is the same life that shoots in joy through the dust of the earth in numberless blades of grass and breaks into tumultuous waves of leaves and flowers.”
यह वही जीवन है जो पृथ्वी की धूल से अनगिनत घास के पत्तों में आनंद से फूटता है और पत्तियों व फूलों की उमड़ती लहरों में टूट जाता है।
यह सुंदर दोहा बताता है कि कैसे एक ही जीवन शक्ति प्रकृति की हर चीज़ में खुशी से धड़कती है। यह वही जीवन है जो मिट्टी से फूटकर अनगिनत घास के तिनके बन जाता है। यही जीवन फिर पत्तों और फूलों की उमड़ती हुई लहरों में बदल जाता है, जो चारों ओर हरियाली और रंग बिखेर देता है। यह हमें याद दिलाता है कि एक ही आनंदमयी चेतना सभी जीवित प्राणियों में स्पंदित होती है, सबसे छोटी घास से लेकर सबसे खिले हुए फूल तक, जो हम सभी को धरती की जीवंत ऊर्जा से जोड़ती है।
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
