“It is the same life that is rocked in the ocean-cradle of birth and of death, in ebb and in flow.”
यह वही जीवन है जो जन्म और मृत्यु के सागर रूपी पालने में, ज्वार-भाटे की तरह, झूलता रहता है। जीवन का चक्र जन्म और मृत्यु के निरंतर प्रवाह में एक समान रहता है।
यह खूबसूरत विचार हमें बताता है कि जीवन, अपने सभी आरंभ और अंत के साथ, एक अंतहीन समुद्र की तरह है। जैसे समुद्र का ज्वार धीरे-धीरे अंदर आता और बाहर जाता है, नई लहरें लाता और पुरानी को पीछे छोड़ जाता है, वैसे ही हमारा अस्तित्व जन्म और मृत्यु दोनों को एक ही, निरंतर यात्रा के स्वाभाविक, आपस में जुड़े हुए हिस्सों के रूप में समाहित करता है। यह सुझाव देता है कि जीवन का सार स्वयं स्थिर रहता है, बस विभिन्न चरणों से गुजरता है, ठीक वैसे ही जैसे एक समुद्र हमेशा एक ही पानी रखता है, भले ही उसकी सतह बदलती रहे। यह एक आरामदायक विचार है कि सब कुछ एक प्रवाहित पूर्णता का हिस्सा है।
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