“When your radiant splendor shone in the gathering at dusk, the moth grew restless, and the candle caught flame.”
शाम के समय जब महफ़िल में आपका सौंदर्य चमका, तो परवाना बेचैन हो उठा और शमा जल उठी।
इस शे’र में महफ़िल में महबूब की आमद का बड़ा ही दिलकश समाँ बाँधा गया है। शाम ढलते ही जैसे ही महबूब का नूरानी हुस्न चमका, उसकी ताब देखकर महफ़िल की शम्अ खुद जल उठी और आशिक़ रूपी परवाना बेक़रार हो गया। यहाँ शम्अ और परवाने के पुराने रूपक को एक नया रंग दिया गया है—महबूब की चमक इतनी असरदार है कि वह माहौल में सिर्फ़ रोशनी ही नहीं, बल्कि हर दिल में इश्क़ की मीठी तड़प भी जगा देती है।
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