ये हुस्न ओ इश्क़ ही का काम है शुबह करें किस पर मिज़ाज उन का नहीं मिलता हमारा दिल नहीं मिलता

“This is the doing of Beauty and Love alone—whom should one suspect? / Their temperament does not relent, nor does our heart give in.”

— अकबर इलाहाबादी
अर्थ

यह सब हुस्न और इश्क़ का ही काम है, फिर किसी और पर क्या शक किया जाए। न उनका मिज़ाज मिलता है और न ही हमारा दिल उनसे मेल खाता है।

विस्तार

इस शेर में शायर हुस्न और इश्क़ की पुरानी कशमकश को बड़े प्यारे अंदाज़ में बयां करता है। यहाँ किसी तीसरे या रक़ीब का कोई दोष नहीं है, बल्कि महबूब की बेरुख़ी और आशिक़ की बेक़रारी का आपस में कभी पूरा मेल न खाना ही मुहब्बत की फ़ितरत है। उनका मिज़ाज अपनी नफ़ासत पर अड़ा है और हमारा दिल अपनी ज़िद पर, और इसी अनबन में इश्क़ का सारा दर्द और कशिश छुपी है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठUnavailable
हिंदी अर्थUnavailable
अंग्रेज़ी अर्थUnavailable
हिंदी विस्तारUnavailable
अंग्रेज़ी विस्तारUnavailable
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.