“A hundred thanks, the death of hope has made the heart at peace and whole; / After long ages, God has shown this welcome countenance to my soul.”
लाख-लाख शुक्र है कि उम्मीद के ख़त्म होने ने दिल को पूरी तरह शांत और एकाग्र कर दिया है; बहुत अरसे के बाद ईश्वर ने यह सूरत दिखाई है।
इस शेर में एक खूबसूरत फलसफा छिपा है—अक्सर उम्मीद ही इंसान को बेचैन और भटकाए रखती है। जब तक किसी चीज़ की आस रहती है, दिल डर और चाहत के बीच झूलता रहता है; लेकिन जैसे ही उम्मीद टूटकर खत्म होती है, दिल को एक अनोखा ठहराव और सुकून मिल जाता है। शायर खुदा का लाख-लाख शुक्र अदा करता है कि लंबे अरसे के बाद ही सही, उम्मीदों की इस उलझन से निकलकर दिल को यह सच्ची शांति नसीब हुई।
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