ग़ज़ल
रुख़ जो ज़ेर-ए-सुंबल-ए-पुर-पेच-ओ-ताब आ जाएगा
رخ جو زیر سنبل پر پیچ و تاب آ جائے گا
यह ग़ज़ल महबूब के घुंघराले गेसुओं और उसके नूरानी चेहरे के सौंदर्य का चित्रण करने के साथ-साथ प्रेम में प्रतीक्षारत दिल की बेकरारी को व्यक्त करती है। इसमें क़ासिद से संदेश जल्द लाने की गुज़ारिश और ख़त के जवाब से मिलने वाले सुकून की तीव्र उम्मीद को बयां किया गया है।
Source: rekhta · HI
गीत सुनें
1
रुख़ जो ज़ेर-ए-सुंबल-ए-पुर-पेच-ओ-ताब आ जाएगा
फिर के बुर्ज-ए-सुंबले में आफ़्ताब आ जाएगा
यदि आपका चेहरा उन घुंघराले और बलखाते बालों के नीचे आ जाएगा, तो ऐसा लगेगा मानो सूर्य लौटकर फिर से कन्या राशि (बुर्ज-ए-सुंबला) में आ गया हो।
2
तेरा एहसाँ होगा क़ासिद गर शिताब आ जाएगा
सब्र मुझ को देख कर ख़त का जवाब आ जाएगा
ऐ संदेशवाहक, अगर तू जल्दी लौट आएगा तो यह तेरा मुझ पर एहसान होगा, क्योंकि ख़त का जवाब देखकर मेरे दिल को सब्र आ जाएगा।
3
हो न बेताब इतना गर उस का इताब आ जाएगा
तू ग़ज़ब में ऐ दिल-ए-ख़ाना-ख़राब आ जाएगा
इतने बेचैन मत हो, क्योंकि अगर महबूब का गुस्सा टूट पड़ा, तो ऐ मेरे बर्बाद दिल, तू बड़ी आफ़त में फँस जाएगा।
4
इस क़दर रोना नहीं बेहतर बस अब अश्कों को रोक
वर्ना तूफ़ाँ देख ऐ चश्म-ए-पुर-आब आ जाएगा
इतना रोना ठीक नहीं है, अब अपने आँसुओं को रोक लो। वर्ना हे अश्कबार आँख, देख कहीं आँसुओं का तूफ़ान न आ जाए।
5
पेश होवेगा अगर तेरे गुनाहों का हिसाब
तंग ज़ालिम अरसा-ए-रोज़-ए-हिसाब आ जाएगा
हे ज़ालिम! अगर तेरे गुनाहों का हिसाब पेश किया गया, तो क़यामत के दिन का विशाल मैदान भी छोटा पड़ जाएगा।
6
देख कर दस्त-ए-सितम में तेरी तेग़-ए-आबदार
मेरे हर ज़ख़्म-ए-जिगर के मुँह में आब आ जाएगा
ज़ुल्म करने वाले हाथ में तुम्हारी चमकदार और पैनी तलवार को देखकर मेरे जिगर के हर ज़ख़्म के मुँह में पानी भर आएगा।
7
अपनी चश्म-ए-मस्त की गर्दिश न ऐ साक़ी दिखा
देख चक्कर में अभी जाम-ए-शराब आ जाएगा
ऐ साक़ी, अपनी मदहोश आँखों को इस तरह मत घुमा, वरना देख अभी शराब का प्याला भी चक्कर खाने लगेगा।
8
ख़ूब होगा हाँ जो सीने से निकल जाएगा तू
चैन मुझ को ऐ दिल-ए-पुर-इज़्तिराब आ जाएगा
ऐ बेचैन दिल, बहुत अच्छा होगा अगर तू मेरे सीने से बाहर निकल जाए, क्योंकि तेरे जाने के बाद ही मुझे चैन और सुकून मिल सकेगा।
9
ऐ 'ज़फ़र' उठ जाएगा जब पर्दा-ए-शर्म-ओ-हिजाब
सामने वो यार मेरे बे-हिजाब आ जाएगा
ऐ ज़फ़र, जब शर्म और झिझक का पर्दा हट जाएगा, तो मेरा महबूब मेरे सामने बेपरदा होकर आ जाएगा।
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