Sukhan AI
સ્વામી કેમ મળશે શાબાશી, ઘેર આવો વસંત વિલાસી.
પિયુ તમ અરથે પલંગ બિછાવું, ખાટ બાંધું ખૂબ ખાસી;

My Lord, how will you earn your praise? Come home, O Spring's delight. My love, for you I spread the bed, a very special cot I set.

दलपतराम
अर्थ

हे मेरे स्वामी, आपको कैसे शाबाशी मिलेगी? हे वसंत का आनंद लेने वाले, घर आओ। मेरे प्रिय, तुम्हारे लिए मैं पलंग बिछाती हूँ, और एक बहुत खास खाट तैयार करती हूँ।

विस्तार

यह दोहा एक प्रियतमा के अपने स्वामी के प्रति गहरे प्रेम और प्रतीक्षा को दर्शाता है। वह अपने पति से बड़े प्यार से पूछती है, "हे वसंत का आनंद लेने वाले प्रियतम, अगर आप घर नहीं आएंगे तो मुझे आपकी शाबाशी कैसे मिलेगी?" वह यह भी कहती है कि उसने उनके लिए बड़े प्यार से बिस्तर बिछाया है और एक खास चारपाई भी तैयार की है। यह एक मधुर निमंत्रण है, जो उसके उत्साह और प्रेम को व्यक्त करता है। वह चाहती है कि उनके प्रिय जल्द लौट आएं और साथ में सुखद पल बिताएं। यह दोहा एक प्रतीक्षा करते हुए प्रेम भरे घर का सुंदर चित्रण करता है।

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पाठ
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