“I heed no words of others, nor speak of my own grief; long live this weary head, bearing madness past relief.”
मैं न दूसरों की बातें सुनता हूँ और न अपना हाल किसी से कहता हूँ; मेरा यह थका-हारा सिर और दीवानेपन की यह कठिन वहशत सलामत रहे।
इस शेर में शायर दुनिया से पूरी तरह कटकर अपने ही भीतर सिमट गया है—न वह किसी की नसीहत सुनता है, न अपने दिल का हाल किसी को बताता है। वह तो बस अपने इस थके और ज़ख्मी सिर की सलामती की दुआ करता है, जो दीवानगी और जुनून का भारी बोझ अकेले ढो रहा है। यह उस तन्हाई का खूबसूरत बयान है जहाँ इंसान का अपना दर्द और वहशत ही उसकी सबसे वफ़ादार साथी बन जाती है।
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