Sukhan AI
બીજો દાવ એકેય શીખી જ નથી!
તુંને શું કહું, માનવની જનની!

No other trick has it ever learned!What shall I say to you, mother of mankind!

ज़वेરचंद मेघानी
अर्थ

इसने कोई दूसरा तरीका या चाल नहीं सीखी है। मैं तुम्हें क्या कहूँ, हे मानव जाति की जननी?

विस्तार

यह दोहा मानव स्वभाव पर एक गहरी टिप्पणी करता है। यह कोमलता से कहता है कि मानवता, या वह मूल तत्व जिससे हम उत्पन्न हुए हैं, अक्सर एक ही पैटर्न, एक ही 'चाल' या जीवन जीने के तरीके को दोहराता है। वक्ता यह दर्शाता है कि 'वह', यानी 'मानवता की जननी', ने वास्तव में कोई अलग तरीका नहीं सीखा है। यह एक मार्मिक अहसास है कि हमारे सभी अनुभवों के बावजूद, हम अक्सर खुद को परिचित चक्रों में फँसा पाते हैं। 'मानवता की जननी, मैं तुम्हें क्या कहूँ!' यह वाक्यांश एक कोमल स्वीकारोक्ति को व्यक्त करता है, बिना कठोर निर्णय के इस अंतर्निहित विशेषता को स्वीकार करता है, लेकिन इसमें एक आश्चर्य या शायद नई बुद्धिमत्ता के लिए सूक्ष्म याचना का भाव भी है।

ऑडियो

पाठ
हिंदी अर्थIn app
अंग्रेज़ी अर्थIn app
हिंदी विस्तारIn app
अंग्रेज़ी विस्तारIn app
Comments

Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.

0

No comments yet.