“I care not to cross the sea of grief, O healer of my pain; no remedy avails me now, the waters have risen above my head.”
ऐ मेरे इलाज करने वाले, मुझे अब दुख के इस समंदर को पार करने की कोई चिंता नहीं है। अब कोई उपाय काम नहीं आ सकता क्योंकि पानी मेरे सिर से ऊपर निकल चुका है।
इस शेर में शायर अपने हमदर्द या तबीब से बड़े दर्द और बेबसी के साथ कह रहा है कि अब उसे बचाने की कोशिशें छोड़ दी जाएं। ग़म को यहाँ एक गहरे समंदर की तरह दिखाया गया है, जिससे पार पाने की अब शायर को कोई फ़िक्र या ख़्वाहिश नहीं रही। 'सर से पानी गुज़र जाना' उस आख़िरी हद को बयां करता है, जहाँ इंसान का दर्द इतना बढ़ जाता है कि दुनिया की कोई भी दवा या दिलासा बेअसर साबित होता है।
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