मुझे जज़्ब-ए-दिल ने ऐ जुज़ बहक के रखा क़दम कोई मुझे पर लगाए शौक़ ने कहीं थक के मैं जो ठहर गया

“My heart’s deep passion sustained me whenever my footsteps went astray; ardent longing granted me wings whenever exhaustion halted my way.”

— नज़्म तबातबाई
अर्थ

जब भी बहक कर मेरा कोई क़दम उठा तो दिल के जज़्बे ने मुझे संभाल लिया, और जब भी मैं थक कर कहीं ठहर गया तो मेरे शौक़ ने मुझे पर लगा दिए।

विस्तार

इस शेर में शायर बताते हैं कि जब मंज़िल की चाह सच्ची हो, तो दिल की लगन ही इंसान की सबसे बड़ी रहनुमा बन जाती है। ज़िंदगी के सफ़र में जब भी क़दम डगमगाए या बहके, तो दिल के गहरे जज़्बे ने उसे संभाल लिया और भटकाव से बचा लिया। और जहाँ कहीं थकान ने हिम्मत तोड़नी चाही, वहाँ आरज़ू और शौक़ ने मानों पर लगा दिए और दोबारा उड़ने का हौसला बख़्शा। यह शेर हमें सिखाता है कि अगर दिल में सच्चा जुनून हो, तो कोई भी रुकावट आपको रोक नहीं सकती।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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