“My frail heart had no strength to bear the wearying toll of strain; / Having survived the grief of waiting, the glad tidings of union slew me.”
मेरे कमज़ोर दिल में ज़रा भी थकान बर्दाश्त करने की ताक़त नहीं थी। मैं इंतज़ार के दुख से तो बच गया था, लेकिन मिलन की ख़ुशख़बरी सुनते ही मेरी जान निकल गई।
इस शेर में शायर ने दिल की नाज़ुक हालत और इश्क़ के अनोखे विरोधाभास को ख़ूबसूरती से बयां किया है। आशिक़ का कमज़ोर दिल जुदाई और इंतज़ार के लंबे दर्द को तो किसी तरह झेल गया, मगर जैसे ही मिलन की ख़ुशख़बरी मिली, वह उस अचानक उमड़ी ख़ुशी की शिद्दत को बर्दाश्त नहीं कर सका। यह इस जज़्बाती हक़ीक़त को दिखाता है कि इंसान कभी-कभी बड़े से बड़े ग़म तो सह जाता है, लेकिन बेपनाह ख़ुशी का सदमा उसकी जान ले लेता है।
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