“Often I wept upon beholding the dew's transient spring; often I smiled, turning my gaze to the laughing rose.”
ओस की बहार देखकर मैं अक्सर रो पड़ा, और खिलते हुए हँसते फूल की तरफ़ देखकर अक्सर हँस दिया।
यह शेर ज़िंदगी के उस नाज़ुक पहलू को बयां करता है जहाँ ग़म और ख़ुशी एक साथ चलते हैं। सुबह की ओस की बहार देखकर, जो पल भर में सूरज की धूप से मिट जाने वाली है, शायर का दिल ज़िंदगी की नश्वरता पर रो पड़ता है। लेकिन उसी बाग़ में जब नज़र खिलखिलाते हुए गुलाब पर जाती है, तो दिल ख़ुद-ब-ख़ुद मुस्कुरा उठता है; यह हमें सिखाता है कि ज़िंदगी आँसुओं और मुस्कान दोनों की एक मिली-जुली दास्तान है।
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