सैकड़ों दाग़-ए-गुनह धो गए रहमत से तिरी क्या घटा झूम के आई थी गुलिस्ताँ की तरफ़

“Hundreds of stains of sin were washed clean by Your grace divine; with what ecstatic grace the raincloud swept toward the garden!”

— नज़्म तबातबाई
अर्थ

आपकी रहमत से पापों के सैकड़ों दाग धुल गए, बिल्कुल वैसे ही जैसे कोई बदरी झूमती हुई बाग़ की तरफ़ आई हो।

विस्तार

इस शेर में ख़ुदा की रहमत की तुलना सावन की उस मस्त घटा से की गई है, जो तपते हुए बाग़ पर झूमकर बरस पड़ती है। शायर कहता है कि इंसान के गुनाहों के सैकड़ों दाग़ पल भर में धुल गए, बिल्कुल वैसे जैसे तेज़ बारिश गुलशन के हर पत्ते को साफ़ और ताज़ा कर देती है। यह शेर बतलाता है कि ईश्वर की दया में कोई सख़्ती नहीं, बल्कि रूह को नया जीवन देने वाली भीनी-भीनी मिठास और बेपनाह मोहब्बत है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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