“I am uniquely caught within the world’s entangled snare; neither do I have a single hand, nor He a thousand hands to spare.”
मैं सांसारिक बंधनों के जाल में एक अजीब हाल में फंसा हुआ हूँ; न तो मेरे पास खुद को बचाने के लिए एक भी हाथ है और न ही किसी के पास मदद के लिए हज़ार हाथ हैं।
इस शेर में शायर दुनिया के बंधनों और झमेलों के जाल में अपनी लाचारी का बड़ा गहरा अहसास कराता है। वह उस जानी-पहचानी कहावत को उलट देता है जिसमें कहा जाता है कि इंसान का तो एक ही हाथ है पर खुदा के हज़ार हाथ मदद के लिए होते हैं। यहाँ शायर खुद को इतना बेबस और तन्हा महसूस करता है कि न तो उसके पास खुद को छुड़ाने के लिए कोई सहारा है, और न ही ऐसा लगता है कि कोई दैवीय शक्ति उसकी मदद को आगे आ रही है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
ऑडियो
Free — just your email. You'll come right back here.
No comments yet. Be the first.
